Kokila Vrat Pratima in Copper

Dimensions: 2.75 inches (H) x 1.7 inches (W)  (6 x 4 cms approx)

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Aashaadh month from the date of the full moon starts Nightingale fast ends on Shravan Purnima. This year it is going to start fasting from 22 July and will end on August 20. The fast refers to the fact that the punishment not only humans get to the deities.

According to the scriptures for the first time this vow to Lord Shiva, Goddess Parvati husband had to get in shape. Parvati Parvati as cuckoo as ten thousand years before his birth to linger in paradisian. After the free curse cuckoo Parvati worshiped as the god Shiva's wife Parvati were delighted and accepted.

According to the scriptures of Lord Shiva, Sati was married to the daughter of Daksha Prajapati. The Prajapati did not like Shiva Shiva married Sati knowing it. Sati was offended by the Prajapati.

Once the Prajapati organized a huge yagna in which all gods summoned but did not invite Shiva and Sati. Sati's father's sacrifice in mind, and the desire to see the persistence of Shiva and Daksha's sacrifice site reached.

This Daksha insulted Shiva and Sati's. Sati could not bear the humiliation and sacrifice was burnt to jump in the pool. Then Shiva destroyed the sacrifice of Daksha's sacrifice and stubbornly Prajpti join the sati cursed Nandan he became ten thousand years are like a cuckoo.

Nightingale vow concerning the recognition that it is the realization of a suitable husband. Married women observe this fast if her husband's life. In the splendor and luxury of the house increases. The beauty that provides fast, because fasting is also considered in this fast rule herbal bath.

Nightingale fast rule for women having the first eight days of amla coated with a bathe. Then eight days to ten drugs code, Jtmasi, raw and dry turmeric, Exchange, Shilajit, sandalwood, discussion champak and nut grass mixed bathing water legislation.

The next eight-day discussion of powder mixed with water in the shower and in the last six days, sesame, Amla and should Srwawsdi bath. Every day after bathing cuckoo cuckoo last day to worship and to arrange his prayers. After worship Brahman or in-laws to give up the cuckoo.

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आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि से कोकिला व्रत आरंभ होता है जो श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होता है। इस वर्ष यह व्रत 22 जुलाई से शुरू हो रहा है और 20 अगस्त को समाप्त होगा। यह व्रत इस बात को दर्शाता है कि सजा सिर्फ इंसानों को ही नहीं देवी-देवताओं को भी मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और पत्नी के रूप में पार्वती को स्वीकार किया।

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से हुआ था। प्रजापति शिव को पसंद नहीं करता था यह जानते हुए भी सती ने शिव से विवाह कर लिया। इससे प्रजापति सती से नाराज हो गया।

एक बार प्रजापति ने बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव और सती को न्योता नहीं भेजा। सती के मन में पिता के यज्ञ को देखने की इच्छा हुई और वह शिव से हठ करके दक्ष के यज्ञ स्थल पर पहुंच गयी।

इससे दक्ष ने शिव और सती का बहुत अपमान किया। सती अपमान सहन नहीं कर सकी और यज्ञ कुण्ड में कूद कर जल गयी। इसके बाद शिव ने दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया और हठ करके प्रजपति के यज्ञ में शामिल होने के कारण सती को श्राप दिया कि वह दस हजार सालों तक कोयल बनकर नंदन बन में रहे।

कोकिला व्रत के विषय में मान्यता है कि इससे सुयोग्य पति की प्राप्ति होती है। विवाहित स्त्रियां इस व्रत का पालन करती हैं तो उनके पति की आयु बढ़ती है। घर में वैभव और सुख की वृद्धि होती है। इस व्रत को सौन्दर्य प्रदान करने वाला व्रत भी माना जाता है क्योकि इस व्रत में जड़ी-बूटियों से स्नान का नियम है।

कोकिला व्रत रखने वाली स्त्रियों के लिए नियम है कि पहले आठ दिन तक आंवले का लेप लगाकर स्नान करे। इसके बाद आठ दिनों तक दस औषधियों कूट, जटमासी, कच्ची और सूखी हल्दी, मुरा, शिलाजित, चंदन, वच, चम्पक एवं नागरमोथा पानी में मिलाकर स्नान करने का विधान है।

इसके अगले आठ दिनों तक पिसी हुई वच को जल में मिलाकर स्नान करें और अंतिम छह दिनों में तिल, आंवला और सर्वऔषधि से स्नान करना चाहिए। प्रत्येक दिन स्नान के बाद कोयल की पूजा करें और अंतिम दिन कोयल को सजाकर उसकी पूजा करें। पूजा करने के बाद ब्राह्मण अथवा सास-श्वसुर को कोयल दान कर दें।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि से कोकिला व्रत आरंभ होता है जो श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होता है। इस वर्ष यह व्रत 22 जुलाई से शुरू हो रहा है और 20 अगस्त को समाप्त होगा। यह व्रत इस बात को दर्शाता है कि सजा सिर्फ इंसानों को ही नहीं देवी-देवताओं को भी मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और पत्नी के रूप में पार्वती को स्वीकार किया।

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से हुआ था। प्रजापति शिव को पसंद नहीं करता था यह जानते हुए भी सती ने शिव से विवाह कर लिया। इससे प्रजापति सती से नाराज हो गया।

एक बार प्रजापति ने बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया जिसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव और सती को न्योता नहीं भेजा। सती के मन में पिता के यज्ञ को देखने की इच्छा हुई और वह शिव से हठ करके दक्ष के यज्ञ स्थल पर पहुंच गयी।

इससे दक्ष ने शिव और सती का बहुत अपमान किया। सती अपमान सहन नहीं कर सकी और यज्ञ कुण्ड में कूद कर जल गयी। इसके बाद शिव ने दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया और हठ करके प्रजपति के यज्ञ में शामिल होने के कारण सती को श्राप दिया कि वह दस हजार सालों तक कोयल बनकर नंदन बन में रहे।

कोकिला व्रत के विषय में मान्यता है कि इससे सुयोग्य पति की प्राप्ति होती है। विवाहित स्त्रियां इस व्रत का पालन करती हैं तो उनके पति की आयु बढ़ती है। घर में वैभव और सुख की वृद्धि होती है। इस व्रत को सौन्दर्य प्रदान करने वाला व्रत भी माना जाता है क्योकि इस व्रत में जड़ी-बूटियों से स्नान का नियम है।

कोकिला व्रत रखने वाली स्त्रियों के लिए नियम है कि पहले आठ दिन तक आंवले का लेप लगाकर स्नान करे। इसके बाद आठ दिनों तक दस औषधियों कूट, जटमासी, कच्ची और सूखी हल्दी, मुरा, शिलाजित, चंदन, वच, चम्पक एवं नागरमोथा पानी में मिलाकर स्नान करने का विधान है।

इसके अगले आठ दिनों तक पिसी हुई वच को जल में मिलाकर स्नान करें और अंतिम छह दिनों में तिल, आंवला और सर्वऔषधि से स्नान करना चाहिए। प्रत्येक दिन स्नान के बाद कोयल की पूजा करें और अंतिम दिन कोयल को सजाकर उसकी पूजा करें। पूजा करने के बाद ब्राह्मण अथवा सास-श्वसुर को कोयल दान कर दें।

Design: Made of copper.
Dimensions: 2.75 inches (H) x 1.7 inches (W)

Copper is well known for its grasping capacity. It grasps the divine spirit (sattvikta) upto 30%, when compared to other metals. Copper can destroy bad spirits like Raj & Tam (i.e. darkness & bad behavior). The spiritual vibrations are attracted towards copper items easily. Just as copper has the ability to absorb the sattvik frequencies of deities, it has also capacity of transmitting them. Thus it becomes rich in divinity in a short period.

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